परिचय

Saturday 22 March 2008

कवि सप्लाई केन्द्र

कवि सप्लाई केन्द्र
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जब इस बार भी-
बिजनिस में हुआ घाटा
तो हमारे ’मनि-माइन्डिड बाप’ ने
हमें डाटा.
बोला-"दो साल में दस ट्रेड बदल चुके हो
जितनी जमा पूंजी थी,सब निगल चुके हो
क्या इसी तरह नाम रोशन करोगे?
यही हाल रहा तो बेटा भूखे मरोगे."
हमें भी बहुत गुस्सा आया
कई दिन तक तो खाना ही नहीं खाया.
अचानक!
हमारे कबाड़ी माइन्ड में
एक धांसू आइडिया आया-
जिसके अनुसार-
हमने अपने मॊहल्ले में
एक ’कवि सप्लाई केन्द्र’ खुलवाया.
एक लम्बा-चॊड़ा बोर्ड लगवाया
जिसपर लिखवाया-
जन्म-दिन हो या शादी
बडे धूम-धाम से मनाईये
डी-जे, डिस्को की जगह
कवि-सम्मेलन करवाइये.
मजबूत,सस्ते व टिकाऊ कवि
हमारे यहां से ले जाईये.
जहां तक विशेष प्रकार के आयोजनों का संबंध हॆ
उसके लिए खूबसूरत कव्यित्रियों का भी प्रबंध हॆ.
एक दिन-
एक सज्जन
हमारे केन्द्र पर पधारे
हम फूल कर हो गये गुब्बारे.
वो बोले-
कोई अच्छा सा कवि दिखाईये
हमने कहा -भाई साहब !
इस दाडी वाले को ले जाईये.
इसकी प्रेमिका ने इसे धोखा दिया हॆ
इसने ’वियोग-रस’ में लिखना शुरु किया हे.
अपने मन का गुब्बार
कविताओं में निकाल रहा हॆ
आज का हतास युवा-वर्ग
इसे ही अपना पथ-प्रदर्शक मान रहा हॆ.
ऒर देखिये-
हमारे यहां कवियों की कई वॆराईटी हॆं
यह जो कोट-पॆंट पहने बॆठा हॆ
एकदम आधुनिक कविता लिखता हॆ
पट्ठा! शब्दों ऒर प्रतीकों का
ऎसा माया-जाल बुनेगा
आम श्रोता की तो बात ही छोडिये
बुद्धिजीवी श्रोता भी
कविता का अर्थ ढूंढने के लिए
अपना सिर धुनेगा.
ऒर देखिये-
सफेद कुर्ता-पाजामा पहने
ये जो नेता टाईप दिखता हॆ
राजनॆतिक कविता लिखता हॆ.
पक्ष हो या विपक्ष
दोनों ही इसे बुलवाते हॆं
कविता के नाम पर
खूब नारे लगवाते हॆं.
ऒर बाबूजी! यह देखिये
आज-कल की सबसे फेमस वॆराईटी
इसकी डिमांड ज्यादा
ऒर कम सप्लाई हॆ
इसलिए इसका रेट जरा हाई हॆ.
अरे साहब इसकी रोनी सूरत पर मत जाईये
यह हास्य-रस में लिखता हॆ
मंच पर पहुंचते ही
ऎसे करतब दिखायेगा
बडे से बडा नट भी
इससे मात खायेगा.
चुटकुला सुना रहा हॆ या कविता
आप समझ नहीं पायेंगें
सिर्फ ठहाका लगायेंगे.
आजकल- रेडियो व टी०वी० वाले भी
इसे ही बुलाते हॆ
सरकारी जलसों में भी
ये ही जनाब जाते हॆ.
ऒर वो देखिये-
उस कॊने में-
जो बॆशाखियों के सहारे खडा हॆ
उस पर देश-भक्ति का भूत चढा हॆ.
26 जनवरी या 15 अगस्त को ही
उसके रेट में कुछ उछाल आता हॆ
वॆसे तो यह पूरे साल हराम की ही खाता हॆ.
अच्छा!
अब मॆं आपको-
कवियों की एक स्पेशल वॆरायटी दिखाता हूं
एक क्रांतिकारी-कवि से मिलवाता हूं.
वॆसे तो खुले रुप से
इसके कविता पढने पर प्रतिबंध हॆ
क्योंकि इसकी कविता में
मानवता की सबसे ज्यादा गंध हॆ.
सुना हॆ-
यह शोषण के विरूद्ध आवाज उठा रहा हॆ
सोते हुए लोगों को जगा रहा हॆ.
सिर्फ मई दिवस पर ही
कोई भूला-भटका ग्राहक
इसके लिए आता हॆ
ऒर आप विश्वास नहीं करेंगें भाईसाहब!
कभी-कभी तो यह
सिर्फ एक वक्त की रोटी के लिए
पूरी-पूरी रात कविता सुनाता हॆ.
खॆर! छोडिये साहब
हमने अब तक कवियों की कई किस्में
अपको दिखाई हॆं
साफ-साफ बताईये-
आपको कॊन-सी पसंद आई हॆ.
हमने तो धंधे का
एक ही वसूल बना रखा हॆ
जिससे दो पॆसे मिल जायें
हमारे लिए तो वही कवि अच्छा हॆ.
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