परिचय

Thursday, 30 April, 2020

डर लगता है!



डर लगता है


किसी के यहाँ जाने में
अपने यहाँ बुलाने में
डर लगता है।
बच्चों को गले लगाने में
यारों से हाथ मिलाने में
डर लगता है।
दुकान से सब्जी लाने में
तुरंत उसे पकाने में
डर लगता है।
टी. वी.का स्विच दबाने में
खबरों पर उसे लगाने में
डर लगता है।
उनको पास बुलाने में
धीरे से हाथ दबाने में
डर लगता है।
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Saturday, 29 June, 2019

दुनिया मुट्ठी में!

दुनिया मुट्ठी में!

उसने कहा-
"कर लो दुनिया मुट्ठी में!"
सभी ने-
मुट्ठियाँ बंद कर लीं!
यूँ लगा-
जीवन की सारी खुशियाँ
अलाद्दीन के
चिराग में भर लीं।
अब हमें-
नहीं चाहिए
वो दीवार घड़ी
जो बीते समय का अहसास कराये
नहीं चाहिए
वो कैमरा-
जो जीवन की सच्ची तस्वीर दिखाये
और नहीं चाहिए
माँ के पल्लू में बधा मुड़ा-तुड़ा नोट
जो अपनेपन का अहसास कराये।
अब हमारे पास-
 मायावी सपने हैं
बेगाने से अपने हैं
न जाने हम कहाँ खो गये हैं
कहने को तो साथ- साथ हैं
पर सच में,बहुत दूर हो गये हैं।
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Wednesday, 18 March, 2015

बच्चे अब बड़े हो रहे हैं





मैंने-
छुपाकर रख दिया है
वो पैन!
जिससे कभी
प्रेम-पत्र लिखा था
फाड़ डाली
वो डायरी!
जिसमें कभी-
सूखा गुलाब रखा था
और-
जला डालीं
वो रंगीन किताबें!
जिन्हें कभी
छुप-छुपकर पढ़ा था।
मैं नहीं चाहता-
फिर से दोहरा जाये
वही पुराना इतिहास
जो कभी-
मैंने रचा था।

Wednesday, 2 March, 2011