परिचय

Sunday 24 June 2007

नीचे झुको

नीचे झुको
जरुर झुको
लेकिन-
इतना नहीं
कि-फिर
उठना भी चाहो
तो उठ न सको.
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1 comment:

Divine India said...

आपकी यह कविता भी मध्यम मार्ग पर आधारित है जो आज की जरुरत है जिसे हम मान नहीं रहे।
बहुत सुंदर्।